विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-अमेरिका संबंध अब अधिक लेन-देन आधारित और कॉर्पोरेट हितों से संचालित होते जा रहे हैं, जबकि वे राजनीतिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक आधार कमज़ोर पड़ रहे हैं, जिन्होंने पहले इन संबंधों को मज़बूती दी थी.
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मार्को रुबियो के भारत दौरे में दिल्ली न आने और जयशंकर के मुंबई जाकर मिलने पर क्यों उठ रहे हैं सवाल

